ऐ वीर शहीदों – Desh Bhakti Shayari

ऐ वीर शहीदों तुमसे इक एहसान और चाहिए – Desh Bhakti Shayari

Desh Bhakti Shayari
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ऐ वीर शहीदों तुमसे,इक एहसान और चाहिए.

इस देश को आजादी,इक बार और चाहिए..

इस बार कोई दुश्मन,ना दूसरा है कोई,

अपनों से ही इस बार,आकर इसे बचाइये..

अये वीर शहीदों तुमसे….

भ्रष्टाचार,कालाबाजारी,घर कर बैठे हर इक मन में.

न किसी को अपना ये माने,बस रहते हैं अपनी धुन में..

अब तक दुश्मन ने लूटा था,अब लूटते हैं इसको अपने .

इस देश के ठेकेदारों से,अब आकर इसे छुड़ाइए..

अये वीर शहीदों तुमसे…….

Desh Bhakti Shayari
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ऐ देश वासियों नेक बनो, इक दो नही अनेक बनो.

छोड़ आपसी द्वेष भावना,रहो प्रेम से एक बनो..

ये तेरा मेरा क्या करते हो,रहो प्रेम से सब मिलकर.

छा जाओ इस दुनिया पर,वो काम करो एकजुट होकर..

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ये कौम हमारी है,ये कौम तुम्हारी है.

क्यूँ लड़ते हो आपस में,ये सब क्या नादानी है..

अब छोड़ो इस नादानी को,इस मुल्क की जिम्मेदारी लो.

तैयार करो सपनों का भारत,खुल कर हिस्सेदारी लो..

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याद करो उन वीरों को,जो देश की खातिर जन्मे थे.

वो भी किसी के शौहर थे,और वो भी किसी के बच्चे थे..

पर देश की खातिर जग छोड़ा,हर सुख सुविधाएँ त्यागी थीं.

बस यहीं से ही आजादी की,सबकी उम्मीदें जागी थीं..

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इस मुल्क की आजादी,बेकार नहीं होगी.

मानवता और इंसानियत की,हार नही होगी..

हर दर्द हम सहेंगे,पर कुछ न हम कहेंगे.

इस देश को भ्रष्टाचार से,बचा के हम रहेंगे..

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ये साँस रुकना जानती है,अब तक वतन के नाम पे.

ये नब्ज जमना जानती है,अब तक चमन के नाम पे..

ऐ चीन तू समझ ले,कमजोर ना भुजाएं.

ये कटार चलना जानती हैं,अब तक अमन के नाम पे..

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कोस-कोस पर पानी बदले,चार कोस पर बोली.

ये भारत स्वयं निराला है,बिन रंगों की रंगोली..

हैं लोग यहाँ के सीधे से,पर मानवता इक आदत है.

हर धर्म की इज्जत करते हैं,जो सबसे बड़ी इबादत है..

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सोने की इस चिड़िया का,अब घोसला खोने को है.

इन्सान और इंसानियत,मजबूर अब होने को है..

अब पग संभालो,पथ संभालो,देश के ऐ वासियों,

जाग कर इन्सान इसके,फिर से अब  सोने को है..(abhishek)

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