बच्चों में कैंसर का कारण – Child Cancer

बच्चों में कैंसर का कारण – Child Cancer

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यदि आप अपने नवजात शिशु या बच्चे की health की बराबर देख रेख करते है तो यह खबर आप के लिए बहुत काम की है –

  • टेलकम पाउडर के द्वारा-

बच्चों में कैंसर के बढ़ने की सम्भावना आप के द्वारा use किया गया प्रोडक्ट , बढ़ा सकता है मुंबई स्थित जोनसन बेबी की फैक्ट्री के प्रोडक्ट की

जाँच में पाया गया कि जिस उसके प्रोडक्ट जोन्सन बेबी पाउडर में इथाइल ऑक्साइड पाया गया जिससे बच्चों को कैंसर का खतरा बढ़ जाता है|                                                                                                                                                                                                               यही कारण है की FDA ने प्लांट का लाइसेंस निलंबित कर दिया है पता चला है की ऐसे तत्त्व टेलकम पाउडर को इथाइल ऑक्साइड से sturlize किये जाने पर बनते है और ये त्वचा के लिए हानिकारक होते है| तथा इनसे  Child Cancer जैसी भयानक बीमारियाँ होने का खतरा बढ़ कई गुना बढ़ जाता है|FDA के जॉइंट कमिशनर ने  कहा – कंपनी के प्रोडक्ट्स में जरूरत से ज्यादा एथलीन ऑक्साइड पाया गया जिससे कैंसर होता है|

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  • 2007 में जारी किया गया था आदेश- 

एथलीन ऑक्साइड का इस्तेमाल टेलकम पाउडर बनाने में किया जाता है लेकिन पाउडर में यह तत्त्व नहीं पाया जाना चाहिए,                      रिपोर्ट के अनुसार यह आदेश 2007 में जारी किया गया था जब कंपनी के प्रोडक्ट्स में हानिकारक कार्सिनोजेनिक तत्त्व पाए गए थे|

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  • सबसे प्रमुख कारण जेनेटिक होता है –

इसके अलावा बच्‍चों में कैंसर का सबसे प्रमुख कारण जेनेटिक होता है। यानी अगर किसी के परिवार में कैंसर है तो वह बच्‍चों को भी हो सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि वह केवल पैरेंट्स में ही हो। जेनेटिक समस्‍या किसी भी पीढ़ी को अपना शिकार बना सकती है। बच्‍चों में सबसे अधिक सामान्‍य कैंसर – ब्‍लड कैंसर, किडनी कैंसर, बोन कैंसर आदि होते हैं। इसके अलावा बच्‍चों में हॉजकिंस डिजीज और लिम्‍फोमा होने की संभावना भी अधिक रहती है। यानी अब बच्‍चे भी कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का शिकार आसानी से हो सकते हैं।

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  • नौंवा सबसे बड़ा कारण है बच्चों में मौत का-

एक अध्ययन के अनुसार, देश में 5 से 14 साल के बच्चों की मौत के मामले में कैंसर नौंवा बड़ा कारण है। लड़के अधिकतर ल्यूकेमिया और लिम्फोमा का जबकि लड़कियां ल्यूकेमिया और ब्रेन ट्यूमर का अधिक शिकार होती हैं।

  • और भी जटिल हो जाता समय के साथ-

(1) वयस्कों की तुलना में बच्चों में किसी भी तरह के कैंसर के मामले 3 फीसदी है। बच्चों में कैंसर के प्रकार और इलाज भी अलग है। उपचार के बाद बच्चों में आगे चलकर कैंसर का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

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(2) बच्चों में कैंसर तेजी से बढ़ता है जिससे पता चलता है कि प्रारंभिक चरण में इसके इलाज की जरूरत होती है। वयस्कों के विपरीत कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट के लिए कैंसर बहुत ही सेंसिटिव होता है, जिस वजह से इसका प्रभावी तरीके से इलाज किया जा सकता है।

(3) वयस्कों में कैंसर होने से उनके लाइफस्टाइल पर प्रभाव पड़ता है जबकि बच्चों में कैंसर का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाता है। बच्चों में पर्यावरण विकिरण, कीटनाशक और वायरस के जैसे कारक कैंसर से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा बच्चों में कैंसर आनुवंशिक गड़बड़ी का कारण भी है।

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(4) अपोलो हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अमिता महाजन के अनुसार, बच्चों में कैंसर के लक्षणों में लंबे समय से बुखार, पीलापन, ब्लीडिंग, हड्डियों व जोड़ों में दर्द, स्वेलिंग, तेजी से वजन कम होना और आंखों का रंग बदलना आदि हैं। क्या आप जानते हैं Child Cancer लक्षण क्या हैंअगर इलाज के बावजूद यह लक्षण 15 दिनों के भीतर कम नहीं होते दिख रहे हैं, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है।

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