hindi poem मैं रहूँ ना रहूँ दुनिया वालों poem on mother in hindi 

Poem On mother In Hindi

poem on mother in hindi 
poem on mother in hindi

मैं रहूँ ना रहूँ दुनिया वालों, तुम याद मुझे ऐसे करना.

इक काम अधूरा छूटेगा,तुम उसे जरा पूरा करना.

मैं रहूँ ना रहूँ दुनिया वालों, तुम याद मुझे ऐसे करना.

कोई दिखे गरीब माँ लड़ते हुए,भूख और लाचारी से.

दो वक्त की रोटी मुश्किल हो,जो घिरी हो जिम्मेदारी से.

महसूस करके तुम उस दुःख को, सवाल  खुदा से ये करना.

कहना -“ए खुदा तू किसी को, इतना भी गरीब क्यों बना देता है.

भूख की आग में, उसके हर  अरमान जला देता है.

 खाता  ठोकर वो हर ओर से खिलौने की तरह,

और तू भी दुनिया को उससे ‘खेलने ‘ का आदी बना देता है”

                                                                 ( “अभिषेक “)

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